To,
Harsh Katyayan
Dear Katu,
जब घर से निकले थे
छाता था एक हाथ में
धूप हो या हो बारिश
बचाता था हर हालात में।
न था एहसास होने का
न कमी उसकी खलती थी
पर पड़ती जब ज़रूरत
तलाश उसकी चलती थी।
तब थी आदत उसको
हमेशा हाथ में उठाने की
अब है धूप में जलने
और बारिशों में नहाने की।
भूल जाने से पहले
जब वो छाता याद आता है
किसी ज़रूरतमंद को उसे
देने को दिल ये चाहता है।
But, unfortunately I've lost it. So, I'm sorry if you get drenched while digging up Harappan artifacts.
Do write back.
Later.
Shivpal.
P.S. : I do have a raincoat though. But I think it won't fit you.
Harsh Katyayan
Dear Katu,
जब घर से निकले थे
छाता था एक हाथ में
धूप हो या हो बारिश
बचाता था हर हालात में।
न था एहसास होने का
न कमी उसकी खलती थी
पर पड़ती जब ज़रूरत
तलाश उसकी चलती थी।
तब थी आदत उसको
हमेशा हाथ में उठाने की
अब है धूप में जलने
और बारिशों में नहाने की।
भूल जाने से पहले
जब वो छाता याद आता है
किसी ज़रूरतमंद को उसे
देने को दिल ये चाहता है।
But, unfortunately I've lost it. So, I'm sorry if you get drenched while digging up Harappan artifacts.
Do write back.
Later.
Shivpal.
P.S. : I do have a raincoat though. But I think it won't fit you.
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